दुमका में जल जीवन मिशन प्रोजेक्ट पर हमला, साइट मैनेजर से मारपीट के बाद 258 करोड़ की योजना पर सुरक्षा का संकट

जामा-जरमुंडी क्षेत्र में चल रहे जल जीवन मिशन प्रोजेक्ट में साइट मैनेजर पर हमला, चोरी और मारपीट की घटना के बाद 258 करोड़ की पेयजल योजना की सुरक्षा पर उठे सवाल

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दुमका:झारखंड के दुमका जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना विवादों में घिर गई है। जामा और जरमुंडी प्रखंड में चल रहे पाइपलाइन प्रोजेक्ट के दौरान साइट मैनेजर के साथ मारपीट और निर्माण स्थल से लोहे की छड़ चोरी की कोशिश की घटना सामने आने के बाद प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। करोड़ों रुपये की इस पेयजल परियोजना पर अब सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

दरअसल, यह परियोजना हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। लेकिन हाल ही में हुई घटना ने इस विकास कार्य की रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुग्गा पहाड़ी में निर्माण स्थल पर चोरी की कोशिश से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार जामा-जरमुंडी क्षेत्र के सुग्गा पहाड़ी इलाके में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTT) का निर्माण कार्य चल रहा है। इसी दौरान निर्माण स्थल से लोहे की छड़ चोरी करने की कोशिश की गई। निर्माण कार्य में लगे कर्मियों ने चोरी कर रहे एक व्यक्ति को रंगे हाथ पकड़ लिया।

बताया जा रहा है कि पकड़े गए व्यक्ति का नाम राजेश सोरेन है। कर्मियों ने जब चोरी का विरोध किया तो मौके पर विवाद हो गया। हालांकि उस समय मामला किसी तरह शांत करा दिया गया था।

अगले दिन साइट मैनेजर पर लोहे की छड़ से हमला

कथित तौर पर अगले ही दिन मामला और बढ़ गया। केरल निवासी प्रोजेक्ट साइट मैनेजर धीरज नायर ने आरोप लगाया है कि राजेश सोरेन और उसके पिता ने उन पर लोहे की छड़ से हमला कर दिया। इस हमले में धीरज नायर घायल हो गए और कुछ समय के लिए बेहोश भी हो गए।

घटना के बाद प्रोजेक्ट में काम कर रहे इंजीनियरों और कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। क्योंकि निर्माण स्थल काफी दूरदराज और सुनसान इलाके में स्थित है।

साइट मैनेजर धीरज नायर ने बताया कि वे पिछले चार साल से इस परियोजना पर काम कर रहे हैं, लेकिन इस तरह की घटना पहली बार हुई है।

उन्होंने कहा कि इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए। अगर चोरी और मारपीट जैसी घटनाएं होंगी तो बाहर से आए इंजीनियर और तकनीकी कर्मियों के लिए यहां काम करना मुश्किल हो जाएगा।

258 करोड़ की योजना पर सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

इस घटना ने करीब 258 करोड़ रुपये की लागत से चल रही जल जीवन मिशन योजना के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। इस परियोजना के तहत हजारों घरों तक पाइपलाइन के जरिए शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

मामले की जानकारी मिलने के बाद पीएचईडी विभाग के कार्यपालक अभियंता रमेश लोहरा ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

साथ ही उन्होंने दुमका के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी है और परियोजना स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

विभाग का कहना है कि पहले जमीन विवाद और भुगतान से जुड़ी समस्याओं के कारण इस परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई थी। बाद में सभी अड़चनों को दूर कर काम को गति दी गई थी, लेकिन अब कानून व्यवस्था की समस्या सामने आ गई है।

3254 घरों तक पहुंचना है मसानजोर डैम का पानी

इस जलापूर्ति योजना के तहत जामा और जरमुंडी क्षेत्र के कुल 3254 घरों तक पाइपलाइन के माध्यम से मसानजोर डैम का शुद्ध पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और पाइपलाइन नेटवर्क का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।

हालांकि इस घटना के बाद निर्माण कार्य से जुड़े कर्मचारियों और इंजीनियरों में डर का माहौल बन गया है, जिससे परियोजना की गति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों ने योजना के समर्थन में जताई आवाज

इस बीच स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस परियोजना के समर्थन में अपनी बात रखी है। गांव के पूर्व मुखिया डुनुच सोरेन का कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इससे पहले भी एक सुपरवाइजर के साथ धक्का-मुक्की की घटना हुई थी, जिसका वीडियो भी मौजूद है। ग्रामीण चाहते हैं कि यह योजना जल्द पूरी हो ताकि उन्हें मसानजोर डैम से शुद्ध पेयजल मिल सके।

जून 2025 तक पूरा होना है प्रोजेक्ट

दुमका जिले की यह महत्वाकांक्षी पेयजल परियोजना जून 2025 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन जिस तरह से दूरदराज इलाके में निर्माण कार्य के दौरान कर्मचारियों के साथ मारपीट और विवाद की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे परियोजना पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और क्या जल जीवन मिशन की यह महत्वपूर्ण योजना तय समय सीमा के भीतर पूरी हो पाती है या नहीं।

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