कांची पुल की धीमी रफ्तार पर राजकिशोर कुशवाहा की दो टूक— “एक साल में एक पिलर भी नहीं”

सालों पहले बना फोरलेन, लेकिन कांची पुल अधूरा—दो लेन में दोनों तरफ का ट्रैफिक, बढ़ रहा हादसों का खतरा

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admin

रांची: रांची से जमशेदपुर को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क NH-33 पर कांची नदी पर बन रहे नए पुल का निर्माण कार्य पूरी तरह सवालों के घेरे में है। एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी पिलर खड़ा नहीं हो सका है, जिससे परियोजना की प्रगति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

यह स्थिति न सिर्फ निर्माण एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती है।

शून्य प्रगति — जमीन पर काम नहीं, सिर्फ कागजों में योजना

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू हुए एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन धरातल पर एक भी पिलर का निर्माण नहीं हुआ है। इससे साफ संकेत मिलता है कि परियोजना की गति बेहद धीमी नहीं, बल्कि लगभग ठप है।

मानसून नजदीक, अब नहीं जागे तो 4 महीने और बंद रहेगा काम

आगामी तीन महीनों में मानसून आने वाला है। यदि बारिश से पहले फाउंडेशन और सबस्ट्रक्चर का काम पूरा नहीं हुआ, तो नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण निर्माण कार्य पूरी तरह रुक जाएगा। ऐसे में यह परियोजना कम से कम 3 से 4 महीने और पीछे चली जाएगी।

राजकिशोर कुशवाहा का आरोप — पेटी कॉन्ट्रैक्ट से काम प्रभावित

आजसू पार्टी के रांची जिला वरीय उपाध्यक्ष राजकिशोर कुशवाहा के अनुसार, मुख्य ठेकेदार कंपनी ने निर्माण कार्य को पेटी ठेकेदारों के हवाले कर दिया है। इससे न केवल काम की गति प्रभावित हुई है, बल्कि गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

सालों पहले फोरलेन बना NH-33, लेकिन पुल अधूरा — खतरे में सफर

NH-33 को सालों पहले फोरलेन में तब्दील किया जा चुका है, लेकिन कांची नदी पर पुल अधूरा होने के कारण पूरी व्यवस्था बाधित है। वर्तमान में केवल दो लेन का उपयोग हो रहा है, जहां दोनों दिशाओं की गाड़ियां एक ही संकरे रास्ते से गुजरती हैं।

संकरी सड़क और भारी ट्रैफिक दबाव के कारण यह इलाका लगातार एक्सीडेंट जोन बन चुका है, जहां आए दिन हादसे हो रहे हैं और लोगों की जान जा रही है।

राजकिशोर कुशवाहा का सीधा आरोप — “एक साल में एक पिलर भी नहीं, ये प्रशासन की विफलता”

राजकिशोर कुशवाहा ने इस पूरे मामले को गंभीर लापरवाही बताते हुए प्रशासन पर सीधा सवाल उठाया है।

उन्होंने कहा, “एक साल बीत गया, लेकिन एक भी पिलर खड़ा नहीं हो सका है। यह साफ तौर पर प्रशासन और ठेकेदार कंपनी की विफलता है। अगर मानसून से पहले काम पूरा नहीं हुआ, तो यह परियोजना और लंबी खिंच जाएगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि फोरलेन बनने के बावजूद पुल अधूरा रहने से आम लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।

राजकिशोर कुशवाहा ने की जांच और कार्रवाई की मांग

राजकिशोर कुशवाहा ने मांग की है कि सड़क परिवहन मंत्रालय और जिला प्रशासन इस पूरे मामले में तत्काल संयुक्त निरीक्षण करे।

साथ ही उन्होंने कहा कि कार्य में देरी और पेटी कॉन्ट्रैक्ट की जांच कर दोषी कंपनी पर सख्त कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह भी मांग की कि जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक पुराने मार्ग पर पर्याप्त लाइटिंग, संकेतक और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं ताकि हादसों पर रोक लग सके।

सवाल बड़ा — कब बनेगा पुल, कब सुरक्षित होगा सफर?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस महत्वपूर्ण पुल का निर्माण कब तक पूरा होगा। हर दिन हजारों लोग इस रास्ते से गुजरते हैं और जोखिम उठाने को मजबूर हैं।

यह मामला अब सिर्फ एक अधूरे निर्माण का नहीं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा और प्रशासन की जवाबदेही का बन चुका है।

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