झारखंड आवासीय विद्यालय कुकडु में तीन दिनों से पानी संकट, प्रशासन हरकत में

370 छात्राओं, शिक्षकों और कर्मियों को हो रही थी परेशानी, बीडीओ-सीओ ने पहुंचकर लिया जायजा; टैंकर से कराई गई अस्थायी जलापूर्ति

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सरायकेला/खरसावां: चांडिल अनुमंडल क्षेत्र स्थित झारखंड आवासीय विद्यालय कुकडु में पिछले तीन दिनों से जल संकट गहराने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। विद्यालय परिसर में बोरिंग का पाइप फट जाने के कारण जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई थी, जिससे छात्राओं, शिक्षकों और कर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

विद्यालय में करीब 340 छात्राएं रहती हैं, जबकि शिक्षक और स्टाफ सहित लगभग 370 लोग परिसर में निवास करते हैं। लगातार तीन दिनों तक पानी नहीं मिलने से विद्यालय में दैनिक कार्य प्रभावित होने लगे थे। मामले की जानकारी धीरे-धीरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनने लगी और समाचार माध्यमों में आने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लिया।

बोरिंग खराब होने से बढ़ी परेशानी

विद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि बोरिंग का पाइप फट जाने के कारण पानी निकलना पूरी तरह बंद हो गया था। इसके चलते छात्राओं को पीने के पानी से लेकर स्नान और अन्य आवश्यक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। विद्यालय प्रबंधन द्वारा स्थानीय स्तर पर समस्या के समाधान का प्रयास किया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका।

बीडीओ और प्रभारी सीओ ने पहुंचकर लिया जायजा

मामले की गंभीरता को देखते हुए कुकडु बीडीओ राजश्री ललिता बाखला और प्रभारी सीओ अभय कुमार विद्यालय पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने विद्यालय प्रबंधन के साथ बैठक कर पूरी स्थिति की जानकारी ली और जल संकट को जल्द दूर करने का आश्वासन दिया।

बीडीओ राजश्री ललिता बाखला ने बताया कि स्थानीय विधायक के निर्देश पर मामले की जांच की गई है। फिलहाल तत्काल पानी की व्यवस्था कर दी गई है, जबकि स्थायी समाधान के लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

वहीं प्रभारी सीओ अभय कुमार ने विद्यालय परिसर से ही विभागीय अधिकारियों से फोन पर बातचीत कर जल्द से जल्द स्थायी जलापूर्ति बहाल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छात्राओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

समाजसेवी ने टैंकर से पहुंचाया पानी

विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्राण महतो ने बताया कि पानी संकट की जानकारी मिलते ही समाजसेवी हरेलाल महतो ने टैंकर के माध्यम से विद्यालय में पानी उपलब्ध कराया। टैंकर से जलापूर्ति होने के बाद छात्राओं और विद्यालय कर्मियों ने राहत की सांस ली।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आवासीय विद्यालय जैसे संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो।

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