खूंटी: देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का झारखंड दौरा शनिवार को खासा ऐतिहासिक और भावनात्मक रहा, जब वे खूंटी जिले स्थित धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पावन जन्मस्थली उलिहातु पहुंचे। इस दौरान उन्होंने न केवल महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों और उनके वंशजों से सीधे संवाद कर एक बड़ा संदेश भी दिया।
पारंपरिक अंदाज में हुआ भव्य स्वागत
उलिहातु पहुंचते ही उपराष्ट्रपति का पारंपरिक नृत्य दल द्वारा भव्य स्वागत किया गया। स्थानीय आदिवासी संस्कृति की झलक के बीच उन्होंने हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इस दौरान उनके साथ झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी मौजूद रहे।
बिरसा ओड़ा में पूजा-अर्चना, प्रतिमा पर माल्यार्पण
उपराष्ट्रपति, राज्यपाल और स्वास्थ्य मंत्री बिरसा ओड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सभी ने धरती आबा को नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया।

वंशजों से मुलाकात, अंगवस्त्र देकर किया सम्मान
दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति ने भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों और उनके सेनापति रहे गया मुंडा के वंशजों से मुलाकात की। उन्होंने उनका हालचाल जाना और अंगवस्त्र भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान वंशजों ने अपनी समस्याएं और क्षेत्र की जरूरतों को भी उनके सामने रखा।
मांगपत्र में उठी विकास की बड़ी मांगें
ग्रामसभा और वंशजों की ओर से उपराष्ट्रपति को एक मांगपत्र सौंपा गया। इस मांगपत्र में उलिहातु को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
इसके साथ ही उलिहातु से बिरबांकी तक पक्की सड़क निर्माण, सिवाय नाला में बड़ा चेकडैम बनाने, क्षेत्र में जल संसाधन मजबूत करने और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग की गई।
शिक्षा और आधारभूत सुविधा पर जोर
मांगपत्र में उलिहातु के आवासीय विद्यालय में प्लस टू की पढ़ाई शुरू कराने की मांग भी शामिल रही, ताकि स्थानीय बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े।
इसके अलावा बिरसा कॉम्प्लेक्स से शिशु मंदिर तक सड़क निर्माण और पूरे क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट लगाने की भी मांग रखी गई।
बिरसा पार्क में श्रद्धांजलि, बच्चों से संवाद
उपराष्ट्रपति ने बिरसा पार्क स्थित आदमकद प्रतिमा पर भी माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों और बच्चों से बातचीत की।
बच्चों के बीच पहुंचकर उन्होंने चॉकलेट और बिस्किट वितरित किए, जिससे बच्चों में खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने भी उपराष्ट्रपति से सीधे संवाद कर अपनी बात रखी।
पहली बार इतना नजदीकी संवाद, ग्रामीणों में उत्साह
इस दौरे की सबसे खास बात यह रही कि पहली बार किसी उच्च पदस्थ नेता ने इस तरह गांव पहुंचकर आम लोगों से सीधे संवाद किया। इससे पूरे क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला।
सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, जुड़ाव और विकास का संदेश
उपराष्ट्रपति का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सरकार और ग्रामीणों के बीच जुड़ाव को मजबूत करने का काम किया। साथ ही, क्षेत्र के विकास को लेकर उम्मीदों को भी नई दिशा दी है।

















