रांची: रांची के तमाड़ में सरहुल पूजा के अवसर पर प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। कोठारी चौक स्थित हाईस्कूल मैदान में सामूहिक सरहुल पूजा समिति द्वारा भव्य आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
इस अवसर पर बंका, खुदीमाड़ी, मुर्गीडीह, मोदुडीह, टिम्पुर और मुरपा सहित कई गांवों से आए सांस्कृतिक दलों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य और वाद्य यंत्रों के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक धुनों पर थिरकते कलाकारों ने पूरे मैदान को उत्सव में बदल दिया।
कार्यक्रम की सबसे खास झलक तब देखने को मिली, जब सरहुल पूजा समिति की अध्यक्ष दमयंती मुण्डा स्वयं पारंपरिक नृत्य में शामिल हुईं और कलाकारों के साथ झूमती नजर आईं। उनकी इस सहभागिता ने न सिर्फ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि दर्शकों के बीच भी खास उत्साह का माहौल बना दिया।
इस दौरान दमयंती मुण्डा ने कहा कि सरहुल केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के मिलन का प्रतीक है। यह पर्व आदिवासी समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करता है और सामाजिक एकता, भाईचारे तथा पारंपरिक मूल्यों को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहां पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे में अपनी परंपराओं को सहेजना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। सरहुल जैसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में हर उम्र के लोग—बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक—एक साथ नाचते-गाते नजर आए। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि आदिवासी समाज में नृत्य और संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समानता का प्रतीक है।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में रमेश मुंडा, रतन सिंह मुण्डा, श्रवण सिंह मुण्डा, मधुसूदन सिंह मुण्डा, कृष्ण सिंह मुण्डा, नंदकिशोर सिंह मुण्डा और भोला मुण्डा सहित कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन भगीरथ सिंह मुण्डा ने किया।
कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए तमाड़ थाना प्रभारी प्रवीण कुमार मोदी पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहे और पूरे आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर बनाए रखी।

















