एम.बी. स्कूल बुंडू में बालिकाओं को आत्मरक्षा और सुरक्षा का प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यशाला का आयोजन

अच्छे-बुरे स्पर्श, साइबर सुरक्षा और ताइक्वांडो प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश

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सुरक्षा के प्रति जागरूकता के साथ आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर

रांची/बुंडू:एम.बी. स्कूल बुंडू में कक्षा 1 से 9 तक की छात्राओं के लिए एक विशेष जागरूकता एवं आत्मरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं को बुरे स्पर्श, यौन उत्पीड़न, साइबर अपराध, अपहरण जैसी संभावित खतरों से बचाव के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनाना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की वाइस प्रिंसिपल मिसेज़ ज़ाहिदा कौसर ने की।

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने छात्राओं को सरल और सहज भाषा में अच्छे एवं बुरे स्पर्श की पहचान, अपने अधिकारों की जानकारी, और किसी भी असहज परिस्थिति में तुरंत विश्वसनीय वयस्कों से मदद लेने के तरीके बताए। साथ ही, बच्चों को सुरक्षित व्यवहार अपनाने, अकेले यात्रा के दौरान सावधान रहने और अनजान लोगों से दूरी बनाए रखने के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।

संवादात्मक सत्रों और उदाहरणों के माध्यम से छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया, जिससे वे बिना किसी झिझक अपनी समस्याएं साझा कर सकें। कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिमों और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

वाइस प्रिंसिपल का विशेष संदेश

“जागरूकता के साथ आत्मविश्वास ही बालिकाओं की सबसे बड़ी सुरक्षा है” – ज़ाहिदा कौसर

अपने संबोधन में वाइस प्रिंसिपल मिसेज़ ज़ाहिदा कौसर ने कहा कि बालिकाओं की सुरक्षा केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से मजबूत और आत्मविश्वासी बनाना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएँ छात्राओं में साहस और आत्मनिर्भरता का विकास करती हैं।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि विद्यालय में नियमित रूप से ताइक्वांडो एवं आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताइक्वांडो प्रशिक्षक ने कहा कि यह प्रशिक्षण छात्राओं को शारीरिक मजबूती, मानसिक संतुलन और आत्मरक्षा के व्यावहारिक कौशल प्रदान करता है, जिससे वे किसी भी आपात स्थिति में खुद की रक्षा कर सकें।

विद्यालय के प्रिंसिपल श्री अबू अब्बास अली ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह की जागरूकता और सुरक्षा से जुड़ी कार्यशालाएँ नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, ताकि छात्राएँ सुरक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बन सकें। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन ने अभिभावकों से भी सहयोग की अपील की, ताकि घर और स्कूल मिलकर बच्चों की सुरक्षा और बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकें।

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