तमाड़ के मरधान स्कूल मैदान में सुदेश महतो का बड़ा संदेश, बच्चों को सम्मानित कर बढ़ाया हौसला, लोक संस्कृति को सहेजने पर दिया जोर

सुदेश महतो ने कहा– संस्कृति से जुड़ना जरूरी, बच्चों को किया सम्मानित

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रांची: रांची के तमाड़ प्रखंड स्थित मरधान स्कूल मैदान में आयोजित ग्रामीण कला एवं खेल महोत्सव ने स्थानीय लोगों के बीच खासा उत्साह पैदा किया। इस भव्य आयोजन में झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान सुदेश महतो ने मंच से उपस्थित लोगों को संबोधित किया और क्षेत्र के स्कूली बच्चों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। बच्चों के चेहरे पर सम्मान पाने की खुशी साफ झलक रही थी, जिससे पूरे आयोजन का माहौल उत्साह और गर्व से भर उठा।

सुदेश महतो ने दिया संस्कृति से जुड़ने का संदेश

अपने संबोधन में सुदेश महतो ने कहा कि लोक कला और संस्कृति हमारी पहचान की सबसे मजबूत कड़ी है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते समय में अपनी जड़ों से जुड़े रहना बेहद जरूरी है और ऐसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने बच्चों और युवा कलाकारों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपनी प्रतिभा को पहचानें और संस्कृति को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। साथ ही उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों को पारंपरिक कला से जोड़ने में सहयोग करें।

छऊ, झुमर, पाईका और उरांव नृत्य ने बांधा समां

महोत्सव के दौरान छऊ, झुमर, पाईका और उरांव सहित विभिन्न झारखंडी लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में मंच पर अपनी कला का ऐसा प्रदर्शन किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

मांदर, ढोल और नगाड़ों की गूंज से पूरा मरधान स्कूल मैदान गूंज उठा और माहौल पूरी तरह से झारखंडी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस कार्यक्रम ने परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सुंदर संतुलन पेश किया।

लोक नृत्य प्रतियोगिता में दिखी प्रतिभा की चमक

कार्यक्रम के तहत आयोजित लोक नृत्य प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हर प्रस्तुति में न केवल कला की झलक दिखी बल्कि अपनी संस्कृति के प्रति गहरा लगाव भी नजर आया। निर्णायकों ने प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर उत्कृष्ट कलाकारों को पुरस्कृत किया।

आयोजक मनीष कुमार महतो को मिला प्रोत्साहन

इस पूरे आयोजन में सक्रिय भूमिका निभा रहे मनीष कुमार महतो की सराहना करते हुए सुदेश महतो ने उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास न केवल ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं।

उन्होंने आयोजन समिति के सभी सदस्यों के प्रयासों की भी सराहना की और भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की बात कही।

बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी, उत्सव में बदला माहौल

कार्यक्रम में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक सामुदायिक उत्सव का रूप दे दिया।

लोगों ने नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भरपूर आनंद उठाया और कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि झारखंड की लोक संस्कृति आज भी जीवंत है और लोगों के दिलों में गहराई से बसी हुई है।

संस्कृति संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

ग्रामीण कला एवं खेल महोत्सव के माध्यम से न केवल मनोरंजन का अवसर मिला, बल्कि लोक कला और परंपराओं को सहेजने का भी संदेश दिया गया।

ऐसे आयोजनों से आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका मिलता है, जो किसी भी समाज के लिए बेहद जरूरी है।

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