सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड के मौजा सपादा में प्रस्तावित बालू घाट संचालन को लेकर आयोजित ग्रामसभा में ग्रामीणों ने कई मांगों के साथ आपत्ति दर्ज कराई। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि बालू घाट क्षेत्र का सीमांकन किए बिना किसी भी तरह का खनन कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
ग्राम प्रधान की अध्यक्षता और अंचल अधिकारी की मौजूदगी में हुई बैठक में जिला खनन विभाग द्वारा ई-नीलामी के जरिए चयनित एजेंसी गो-क्वेस्ट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्रामसभा की सहमति और स्थानीय मुद्दों को पर्याप्त महत्व दिए बिना प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
मशीनों से खनन पर जताई आपत्ति
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने मशीनों से बालू उठाव का विरोध किया। उनका कहना था कि मशीनों के इस्तेमाल से स्थानीय मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ेगा। ग्रामीणों ने मांग की कि घाट संचालन की स्थिति में स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए और बाहरी मजदूरों व मशीनों के उपयोग पर रोक लगे। ग्रामसभा कोष में रॉयल्टी जमा कराने की मांग भी उठाई गई।
सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों का मुद्दा उठा
बैठक में ग्रामीणों ने दावा किया कि प्लॉट संख्या 1107P श्मशान घाट के रूप में उपयोग में है, जबकि 2122P में ग्राम मंदिर और सार्वजनिक गतिविधियां संचालित होती हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि खनन गतिविधियों से इन स्थलों पर असर पड़ सकता है।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने कहा कि खनन शुरू करने से पहले संबंधित विभाग को ग्रामसभा की आपत्तियों और मांगों का समाधान करना चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों की अनदेखी कर खनन शुरू किया गया तो विरोध आंदोलन किया जाएगा।
बैठक में मुखिया सुधीर सिंह, ग्राम प्रधान पीताम्बर सिंह मानकी, पूर्व प्रमुख शंकर सिंह मुंडा, गौरांग प्रामाणिक समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

















